झारखण्ड छात्र आंदोलन 13वां दिन

झारखण्ड छात्र आंदोलन 13वां दिन

The Jagran News: JPSC-JSSC आंदोलन का 13वां दिन - वार्ता पर फंसा पेंच, सरकार बोली 'सिर्फ छात्र', छात्रों की जिद 'पत्रकार और वकील भी होंगे साथ'

​JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को आंदोलन के 13वें दिन छात्रों ने रात में फ्लैश लाइट मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि, सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होने से पहले ही प्रतिनिधिमंडल के नामों को लेकर गतिरोध बन गया है।

​सरकार ने मांगे 5 नाम, छात्रों ने भेजे 11

सरकार ने बातचीत के लिए 5 छात्रों के नाम मांगे थे। इसके जवाब में छात्रों ने 11 सदस्यों की एक लिस्ट SDO को सौंप दी। दिन भर छात्र बुलावा आने का इंतजार करते रहे, लेकिन सरकार की तरफ से कोई संदेश नहीं आया।

​रात 10:45 बजे का ड्रामा: 45 मिनट चली बहस

देर रात करीब 10:45 बजे SDO कुमार रजत और ADM लॉ एंड ऑर्डर धनंजय कुमार धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का हाल जाना। इसके बाद बातचीत शुरू हुई, लेकिन अफसरों ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार "सिर्फ छात्रों" से बात करना चाहती है। वहीं छात्र अपनी 11 सदस्यों वाली पुरानी लिस्ट पर ही अड़े रहे। करीब 45 मिनट तक मान-मनौव्वल चला, लेकिन बात नहीं बनी और अधिकारी खाली हाथ लौट गए।

​आखिर लिस्ट में कौन-कौन है?

छात्रों की तरफ से जो 11 नाम भेजे गए हैं, उनमें सिर्फ छात्र ही नहीं हैं। इस लिस्ट में 8 छात्र (रविंद्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविंद्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार, शालू सिंह), 2 पत्रकार (प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा) और 1 पूर्व महाधिवक्ता (अजीत कुमार) शामिल हैं। अधिकारियों का कहना था कि यह सूची अधूरी है, जबकि छात्रों ने दो-टूक जवाब दिया कि उनकी सूची पूरी तरह से फाइनल है।

​क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?

छात्रों ने बातचीत से पहले अपना मांग पत्र भी तैयार रखा है:

​पारदर्शिता: PT और Mains का कट-ऑफ व स्कोर कार्ड जारी हो। OMR और Mains की कॉपियां ऑनलाइन अपलोड हों।

​त्वरित न्याय: पेपर लीक और घोटालों की जांच के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बने और 90 दिन में निपटारा हो।

​मुआवजा: उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को 1-1 करोड़ की सहायता मिले।

​गैर-राजनीतिक नियुक्तियां: JPSC और JSSC में राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को अध्यक्ष या सदस्य न बनाया जाए।

​परीक्षा कैलेंडर: JSSC की सभी भर्तियों का एक फिक्स परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए।

​विधानसभा में भी गूंजा मुद्दा

जेपीएससी-जेएसएससी का यह मुद्दा गुरुवार को झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में भी गरमाया रहा। बीजेपी विधायक मास्क पहनकर और हाथों में "न्याय चाहिए, धोखा नहीं" लिखी तख्तियां लेकर पहुंचे। उन्होंने JPSC-JSSC सहित सभी परीक्षाओं की CBI जांच कराने की पुरजोर मांग की।